Friday, April 23, 2010

Alvida

सब सपने पूरे होने पे सुंदर लगे ये ज़रूरी तो नही,
कई ख्वाब अधूरे अच्छे है, पूरे हुए जो वो पूरे तो नही,
तुम दूर रहोगे पर खुश तो होगे ये सोचता रहता हू,
पर संभाल ना पाऊँगा उन सपनो के बोझ जो सहता हू,
कुछ जो साथ देखे थे,
वो ख्वाब तुम्हारे पास छोड़ के जाना चाहता हू

फिर से देखना उन ख्वाबों को अकेले मेरे बिना,
ज़िंदगी कितनी तेज़ कहा चली आई समझ पाओगे,

वो शुरुआत के दिन के थे,
दुनिया से परे, चाँद पे ठहर,
रोशनी में नहाया एक अकेला घर बनाने के ख्वाब थे,
कुछ और दिन ये ख्वाब देखोगे तो घर को जलता पाओगे,
तुम उसकी आग अपने तक ही रखना,
उस आग की तपिश में गर्म महसूस नही करना चाहता हू,
वो ख्वाब तुम्हारे पास छोड़ के जाना चाहता हू,

फिर वो ख्वाब देखा था
जो एक नन्ही परी के नन्ही मुस्कान का था,
वो ख्वाब में चमकती उन आँखों को फिर से देखना,
वो भूरी आँखों का रंग
उम्र के उस छोर पे भी मेरी आँखों सा दिखता रहेगा,
रिश्तो के नाम से पुकारती आवाज़ सुन, आँसू रोक नही पता हू,
वो ख्वाब में तुम्हारे पास छोड़ के जाना चाहता हू

और भी हज़ारों ख्वाब है,

कुछ ख्वाब जो जन्मे थे सुनहेरी सुबह में
दो जोड़ी पैरो के मिल जाने से,
कुछ रसोई में छोन्के से,
कुछ रुपेहरी धोखे से,
कुछ जो चले थे साथ चाँदनी में पत्तो पे,
कुछ बारिश में गर्म चाय के प्यालो से बरसे थे,
उन ख्वाबों का बोझ हमेशा ना उठा सकता हू,
वो ख्वाब में तुम्हारे पास ही छोड़ के जाता हू,

नही छोड़ा तो,
तुम बिन दिल पे बोझ बने रहेंगे,
तुम ले जाओ अपने साथ उन्हे,
तुम्हारी तो आदत है मेरे ख्वाबो को मुस्कान देने की.

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