Missing Happy, wrote just like that
मेरी लंबी उंगलिओ पे,
वो छोटे हाथ तुम्हारे, याद आते है,
बेरंग दिन की दौड़भाग में,
वो तेरे लाल गुब्बारे, याद आते है,
ये ठंडी हवा की गुदगुदी पे क्यों,
तेरी हँसी के फव्वारे, याद आते है,
रोशन शहर, तन्हा रहे है,
तेरी आँखों के दो तारे, याद आते है
Thursday, February 3, 2011
Tuesday, January 18, 2011
હુંફાડી ઍક કોઈ ક્ષણ રહે - A poem
(Tried posting everything I missed posting from my Infosys internal blogs from last year)
વાતો પ્રેમ ની ઍવિજ રહે છે, સદી કોઈ પણ રહે,
દાનત રહે સાર વચન નો, પછી જે કોઈ પ્રણ રહે,
બે હૃદય ના વચ્ચે સંબંધો ને નામ ની નથી જરૂર,
ઍક સ્પર્શ રહે પ્રેમાળ, હુંફાડી ઍક કોઈ ક્ષણ રહે,
પ્રીત ના પતંગ મા, કાંના ની ગાંઠ ધીમે બાંધજો,
થોડી હવા થી ડગમગતી રહે, થોડા કોઈ કામણ રહે
ભોમિયાઓ માટે પણ, વિચિત્ર છે ભૂગોળ પ્રેમ નો,
આગ નો દરિયો કહે કોઈ, કોઈ વિરાન છે રણ કહે
મીરા-રાધા ભાગલા કરતાનથી,કૃષ્ણ અર્થ પ્રેમ નો,
પૂજા મામારો રહે, અને રાસલીલામાતારો પણ રહે
વાતો પ્રેમ ની ઍવિજ રહે છે, સદી કોઈ પણ રહે,
દાનત રહે સાર વચન નો, પછી જે કોઈ પ્રણ રહે,
બે હૃદય ના વચ્ચે સંબંધો ને નામ ની નથી જરૂર,
ઍક સ્પર્શ રહે પ્રેમાળ, હુંફાડી ઍક કોઈ ક્ષણ રહે,
પ્રીત ના પતંગ મા, કાંના ની ગાંઠ ધીમે બાંધજો,
થોડી હવા થી ડગમગતી રહે, થોડા કોઈ કામણ રહે
ભોમિયાઓ માટે પણ, વિચિત્ર છે ભૂગોળ પ્રેમ નો,
આગ નો દરિયો કહે કોઈ, કોઈ વિરાન છે રણ કહે
મીરા-રાધા ભાગલા કરતાનથી,કૃષ્ણ અર્થ પ્રેમ નો,
પૂજા મામારો રહે, અને રાસલીલામાતારો પણ રહે
थोड़े और गंभीर बनो - A poem
धीर बनो तुम वीर बनो, तुम बहता कोई नीर बनो,
वक़्त है बोलो, देखो-सुनो, ऐसे ना मूक-बधिर बनो,
युद्ध भूमि में प्रबीर बनो तुम, अपनी सोच में कबीर बनो,
सीखो सब से अच्छे गुण, तुम राम के दस-दस सिर बनो,
कंटक पथ पे फूल बनो तुम, शत्रु पे बरसते तीर बनो,
अधिकांश में आम रहो तुम, अपनी बातों में माहिर बनो,
दीपक राग बनो सत्य-ताल पे, ना अज्ञान का तिमिर बनो,
वक़्त यही है, नौजवान हो, संभलो, थोड़े और गंभीर बनो
वक़्त है बोलो, देखो-सुनो, ऐसे ना मूक-बधिर बनो,
युद्ध भूमि में प्रबीर बनो तुम, अपनी सोच में कबीर बनो,
सीखो सब से अच्छे गुण, तुम राम के दस-दस सिर बनो,
कंटक पथ पे फूल बनो तुम, शत्रु पे बरसते तीर बनो,
अधिकांश में आम रहो तुम, अपनी बातों में माहिर बनो,
दीपक राग बनो सत्य-ताल पे, ना अज्ञान का तिमिर बनो,
वक़्त यही है, नौजवान हो, संभलो, थोड़े और गंभीर बनो
हम बुलबुले तो है, पर ये गुलशितान मेरा नही - A poem
Wrote sometime last year after the various blasts and train derailment etc.
वो जो जल रहा है कही, वो बदन मेरा नही,
वो बेवा मेरी नही, बच्चों पे कफ़न मेरा नही,
हम बुलबुले तो है, पर ये गुलशितान मेरा नही,
जो चाहा था वैसा रहा ये हिन्दुस्तान मेरा नही,
वो तो कोई तेज़ उड़ती चिड़िया थी सोने की,
उसको नादान हमने कोई गुड़िया सी होने दी,
ये गिद्ध कौन है, जो चिड़िया के अंडे खा रहे है,
गुड़िया के जिस्म को बेच बेच दौलत पा रहे है,
गर हम-वतन है ये, तो ये हम-वतन मेरा नही,
जो चाहा था वैसा रहा ये हिन्दुस्तान मेरा नही,
मातृभूमि के वीर की राह में जो फूल बीछे मुरझाए,
बारूद की एक-एक फूँक में सारे राख बन उड़ जाए,
कहीं पैसो की लालच में अब कौभान्ड बनाए जाते है,
कही लाशों पे चल राम के सारे स्वांग रचाए जाते है,
सीता को लज्जित करे वो भगवान मेरा नही,
जो चाहा था वैसा रहा ये हिन्दुस्तान मेरा नही,
जिनके खून के रंग भी बसंती रंग गये थे कभी,
जिनकी हर एक साँस में आज़ादी ही थी बसी,
उनके नाम पे राहे है पर उनका मान ठहरा नही,
हम बुलबुले तो है, पर ये गुलशितान मेरा नही,
जो चाहा था वैसा रहा ये हिन्दुस्तान मेरा नही,
वो जो जल रहा है कही, वो बदन मेरा नही,
वो बेवा मेरी नही, बच्चों पे कफ़न मेरा नही,
हम बुलबुले तो है, पर ये गुलशितान मेरा नही,
जो चाहा था वैसा रहा ये हिन्दुस्तान मेरा नही,
वो तो कोई तेज़ उड़ती चिड़िया थी सोने की,
उसको नादान हमने कोई गुड़िया सी होने दी,
ये गिद्ध कौन है, जो चिड़िया के अंडे खा रहे है,
गुड़िया के जिस्म को बेच बेच दौलत पा रहे है,
गर हम-वतन है ये, तो ये हम-वतन मेरा नही,
जो चाहा था वैसा रहा ये हिन्दुस्तान मेरा नही,
मातृभूमि के वीर की राह में जो फूल बीछे मुरझाए,
बारूद की एक-एक फूँक में सारे राख बन उड़ जाए,
कहीं पैसो की लालच में अब कौभान्ड बनाए जाते है,
कही लाशों पे चल राम के सारे स्वांग रचाए जाते है,
सीता को लज्जित करे वो भगवान मेरा नही,
जो चाहा था वैसा रहा ये हिन्दुस्तान मेरा नही,
जिनके खून के रंग भी बसंती रंग गये थे कभी,
जिनकी हर एक साँस में आज़ादी ही थी बसी,
उनके नाम पे राहे है पर उनका मान ठहरा नही,
हम बुलबुले तो है, पर ये गुलशितान मेरा नही,
जो चाहा था वैसा रहा ये हिन्दुस्तान मेरा नही,
Trying different types of poetry
घर घर तुझको पूजे सब,
कहकर एसु-राम,
सब में छुप कर तू कहे,
में हूँ तेरा काम
पटरी पे चलती रेल से,
सब ने पाए भाग,
जहन के माथे पे जो लगे,
धो कर ना जाए दाग
आँगन की अटखेलियाँ,
खेल जो बीते साल,
छोड़ ये आँखें होती क्यों,
मेहन्दी के संग लाल
गीत बने संसार के सारे,
जोड़ के हर एक सुर,
बूँद ना रहे संग नदी जो,
वो बह ना पाए दूर
युद्ध की अपनी भाषा है,
बम-धमाके सुन,
शहीदो को सुनाती धरती,
लॉरी की कोई धुन
आम जो पकते धूंप में,
मीठे लगे जब खाए,
समज भी हार में छुप के,
कठिनाई से आए
कहकर एसु-राम,
सब में छुप कर तू कहे,
में हूँ तेरा काम
पटरी पे चलती रेल से,
सब ने पाए भाग,
जहन के माथे पे जो लगे,
धो कर ना जाए दाग
आँगन की अटखेलियाँ,
खेल जो बीते साल,
छोड़ ये आँखें होती क्यों,
मेहन्दी के संग लाल
गीत बने संसार के सारे,
जोड़ के हर एक सुर,
बूँद ना रहे संग नदी जो,
वो बह ना पाए दूर
युद्ध की अपनी भाषा है,
बम-धमाके सुन,
शहीदो को सुनाती धरती,
लॉरी की कोई धुन
आम जो पकते धूंप में,
मीठे लगे जब खाए,
समज भी हार में छुप के,
कठिनाई से आए
अपने सपनो ही के लिए - A poem
मुश्किल बहुत है यहाँ पे अपने सपनो ही के लिए जीना,
अपने लिए जीना हो या हो अपने अपनो के लिए जीना,
दोराहें है और मोड़ भी है,सफ़र मे हर कदम जहा जाओ,
मंज़िलों के लिए जीना हो, या हो कदमो के लिए जीना?
दिये लिए चलना, रोशन नही है राह सूरज से हर जगह,
आँख बँध हो तो किसी और लौ मे जलने के लिए जीना,
अकेले आए थे पर रिश्ते जो हम बनाते चले, तो अब है,
कुछ कसमो के लिए जीना तो कुछ रस्मो के लिए जीना
मुश्किल बहुत है यहाँ पे अपने सपनो ही के लिए जीना,
अपने लिए जीना हो या हो अपने अपनो के लिए जीना
अपने लिए जीना हो या हो अपने अपनो के लिए जीना,
दोराहें है और मोड़ भी है,सफ़र मे हर कदम जहा जाओ,
मंज़िलों के लिए जीना हो, या हो कदमो के लिए जीना?
दिये लिए चलना, रोशन नही है राह सूरज से हर जगह,
आँख बँध हो तो किसी और लौ मे जलने के लिए जीना,
अकेले आए थे पर रिश्ते जो हम बनाते चले, तो अब है,
कुछ कसमो के लिए जीना तो कुछ रस्मो के लिए जीना
मुश्किल बहुत है यहाँ पे अपने सपनो ही के लिए जीना,
अपने लिए जीना हो या हो अपने अपनो के लिए जीना
ये जग के चाँद - A poem
याद है मुझे, कुछ दिन पहले की ये बात है,
मुन्ने ने ली थी ज़िद, रहना उसको साथ है,
नाइट-शिफ्ट के टाइम कहा उसे ले जाता मैं,
बात घुमा, हर बार नयी लॉरी कोई गाता मैं,
"पापा, कब जाएँगे हम रात में टहलने को",
पौने चाँद को दिखा बोला "उसे पूरा होने दो",
कल सुबह ऑफीस से जब में घर लौटा तो,
देखा सुबक़ सुबक़ कोने में बैठ था रोता वो,
"किसीने हमारी बात सुनी थी, कोई तो नया है,
हर रात चाँद को काट काट के घर वो ले गया है,
"हम टहलने ना जाएँगे, उसने हम दोनो को लूटा है,"
कैसे बताता उसको मैं, एक काम था वो भी छूटा है,
अब कोई ना नाइट शिफ्ट है, कोई पैसा ना आएगा,
अमावस के चाँद सी ही रोटी भी घटती अब खाएगा,
सुबह फिर हम दोनो चुपचाप दुखीसे सो गये यहाँ,
फिर आज रात दौड़ के आया, बदल रहा था जहाँ,
"पापा चाँद फिर आया है, काफ़ी सुख गया है लेकिन"
क्या आपको लगता है, हम टहलने जाएँगे एक दिन?
चाँद के पूरे होने की हरदम, ऐसे ना बेटा तू राहें देख,
तू ही मेरा पूरा चाँद है, किसी और चंदा की बातें फेंक,
चल आज संग चलते है, शीतल चाँदनी में हम साथ नहाएँगे,
ये जग के चाँद बढ़ घट के किसी दिन साथ हमारे हो जाएँगे
मुन्ने ने ली थी ज़िद, रहना उसको साथ है,
नाइट-शिफ्ट के टाइम कहा उसे ले जाता मैं,
बात घुमा, हर बार नयी लॉरी कोई गाता मैं,
"पापा, कब जाएँगे हम रात में टहलने को",
पौने चाँद को दिखा बोला "उसे पूरा होने दो",
कल सुबह ऑफीस से जब में घर लौटा तो,
देखा सुबक़ सुबक़ कोने में बैठ था रोता वो,
"किसीने हमारी बात सुनी थी, कोई तो नया है,
हर रात चाँद को काट काट के घर वो ले गया है,
"हम टहलने ना जाएँगे, उसने हम दोनो को लूटा है,"
कैसे बताता उसको मैं, एक काम था वो भी छूटा है,
अब कोई ना नाइट शिफ्ट है, कोई पैसा ना आएगा,
अमावस के चाँद सी ही रोटी भी घटती अब खाएगा,
सुबह फिर हम दोनो चुपचाप दुखीसे सो गये यहाँ,
फिर आज रात दौड़ के आया, बदल रहा था जहाँ,
"पापा चाँद फिर आया है, काफ़ी सुख गया है लेकिन"
क्या आपको लगता है, हम टहलने जाएँगे एक दिन?
चाँद के पूरे होने की हरदम, ऐसे ना बेटा तू राहें देख,
तू ही मेरा पूरा चाँद है, किसी और चंदा की बातें फेंक,
चल आज संग चलते है, शीतल चाँदनी में हम साथ नहाएँगे,
ये जग के चाँद बढ़ घट के किसी दिन साथ हमारे हो जाएँगे
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